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रविवार, 14 अप्रैल 2019

सड़क निर्माण के पहले ही सरपंच सचिव ने 15 हजार रुपए से कर दी सीसी रोड की तराई

सड़क निर्माण के पहले ही सरपंच सचिव ने 15 हजार रुपए से कर दी सीसी रोड की तराई


जलसंकट से परेशान ग्राम के लोग तो वहीं बन रही सीसी रोड का निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी लौटे खाली हाथ तेन्दूखेड़ा के दलपतखेड़ा गांव में चल रहा था घटिया सड़क का निर्माण

तेन्दूखेड़ा/दमोह: (ब्यूरो विशाल रजक) जनपद के तेन्दूखेड़ा जनपद पंचायत में किस तरह से गोलमाल किया जा रहा है यह वहां की पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों के बिल बयां कर रहे हैं।ऐसा ही मामला फिर प्रकाश में आया है जहां गांव के लोग बूंद बूंद पानी मे के लिए परेशान हो रहे थे और वहां पर सीसी रोड का निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।जबकि कलेक्टर के द्वारा किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर रोक लगाई थी।ग्रामीणों ने इसकी शिकायत और घटिया सामग्री के इस्तेमाल करने की शिकायत भी अधिकारियों से की इतना ही नहीं सबसे बड़ी गड़बड़ी तो यह निकलकर सामने आई है कि सड़क निर्माण कार्य इसी सप्ताह पूरा हुआ और पंचायत ने निर्माण के पहले ही हजारों रुपए के पानी से सिंचाई कर डाली।शिकायत मिलने पर जब अधिकारी सड़क निर्माण की जांच करने पहुंचे तो वहां कार्य पूर्ण मिला और गुणवत्ता के नाम पर भी कुछ नहीं मिल पाया।इसलिए अब सहायक यंत्री नोटिस काटने की बात कह रहे हैं गौरतलब हो कि यह सड़क निर्माण कार्य आचार संहिता में किया गया है और अभी तक इस संबंध में कोई भी कार्रवाई प्रस्तावित नहीं की गई। नईदुनिया के द्वारा इस पूरे मामले को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया था।निर्माण कार्य आज से कुछ दिन पहले ही शुरू हुआ था वह भी आचार संहिता लागू होने के बाद।जबकि इस प्रकार के निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध था पांच दिन पहले मतलब 8 अप्रैल को सड़क का निर्माण पूरा हुआ और ग्राम पंचायत ने 17 अप्रैल को सड़क की तराई करने का भुगतान कर दिया और वह भी 25 दिन का ।इसके अलावा जो भी कार्य मौके पर हुआ ही नहीं है उसका भी भुगतान हुआ है जिसमें बैवेंटर सेटिंग जो इस प्रकार है मिक्चर किराया सात दिन जिसका भुगतान4200 रुपए बैवेटर्मशीन जो चली ही नहीं उसका सात दिन में चार सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से सात दिन का भुगतान2800 रुपए सेटिंग के किराए के नाम 4760 रुपए के अलावा पानी परिवहन के रुप में 25 दिन के लिए15 हजार रुपए का भुगतान हुआ है अब इन भुगतानों को देखकर यही लगता है कि या तो यह सड़क फरवरी में बनी है या फिर फर्जी रुप से इसका भुगतान हो गया।शिकायत होने के बाद सहायक यंत्री केपी पटेल दलपतखेड़ा गांव गए थे उन्हें निर्माण कार्य अंतिम रूप मिला और गुणवत्ता में कमी मिली।साथ ही उपयंत्री रानी चौरसिया भी सड़क निर्माण के समय मौके पर नहीं मिली।इसके बाद उन्होंने सचिव सरपंच और उपयंत्री को नोटिस काटकर जवाब मांगा है कि आचार संहिता के समय निर्माण कार्य कैसे हुआ है।

पंचायत ने तराई का कर भुगतान भी कर दिया
अजीतपुर ग्राम पंचायत के दलपतखेड़ा गांव में जिस समय सड़क निर्माण कार्य चल रहा था।उसी समय इस कार्य की शिकायत हुई थी लेकिन जब सड़क के भुगतान की जानकारी मिली तो सभी अचंभित रह गए।क्योंकि सड़क का निर्माण भले ही इसी सप्ताह हुआ हो लेकिन पंचायत ने सड़क की तराई एक महीने पहले 15 हजार रुपए में करवा दी और उसका भुगतान भी हो गया एक महीने पहले पानी के नाम पर लिया गया भुगतान अपने आप ही भ्रष्टाचार की कहानी बंया कर रहा है।ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण में जिस सामग्री का उपयोग ही नहीं हुआ उसके नाम पर भी भुगतान हुआ है किसी भी निर्माण के बाद उस पर पानी डाला जाता है लेकिन यहां पर सड़क बनने के पहले ही उस पर पानी फेर दिया।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस मामले में सरपंच सचिव की मिलीभगत है।

पंचायत सचिव बोले-जनपद सीईओ सिद्ध करें आचार संहिता में हुआ है निर्माण कार्य
निर्माण के पहले पानी के नाम पर हुए भुगतान के संबंध में तेन्दूखेड़ा मुख्य कार्यपालन अधिकारी मनीष बागरी ने बताया कि उनके पास शिकायत आई है कि आचार संहिता के समय सड़क का निर्माण कार्य हुआ है।साथ ही निर्माण के पूर्व तराई के नाम पर पैसे निकाले गए हैं ।इसकी जांच की जा रही है जिसका प्रतिवेदन जिला पंचायत भेजा जाएगा।वहीं अजीतपुर ग्राम पंचायत के सचिव शिखरचंद जैन का कहना है कि 10 फरवरी को पैसा निकाला गया।आचार संहिता में काम नहीं हुआ और यदि जनपद पंचायत सीईओ कह रहे हैं कि आचार संहिता में सड़क का निर्माण हुआ है तो वह सिद्ध करके बताए।गौरतलब हो कि आचार संहिता दस मार्च से लागू हुई थी और बिल भी इसके बाद ही निकला है फिर सचिव कैसे कह रहे हैं कि उन्होंने फरवरी में भुगतान किया है।

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