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शनिवार, 20 अप्रैल 2019

सरकारी डॉक्टर निजी क्लीनिक व अस्पताल चलाने में मस्त, जनता बेचारी इलाज के लिए त्रस्तGLOBAL INDIA TV NEWS

चिकित्सा प्रभारी निजी क्लीनिक व अस्पताल चलाने के चक्कर मे समुदायिक स्वास्थ केन्द्र राम नगर पहुचने से रहते नदारत


अम्बेडकर नगर: 20/04/2019 (जितेंद्र निषाद) अक्सर देखा जाता है कि जो डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए नियुक्त किया जाता है वो सरकारी चिकित्सालय /स्वास्थ्य केंद्र में कम मिलते है अपने निजी अस्पताल और निजी क्लीनिक में ज्यादा पाए जाते है। ये डॉक्टर्स अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस में ज्यादा व्यस्त रहते है। 
सरकारी अस्पताल के वार्ड बॉय ही मरीजो को सरकारी डॉक्टरों के क्लीनिक और अस्पताल भेजते है और बदले में कमीसन पाते है।
होता ये है कि सरकारी अस्पताल में 1-2 रुपये के पर्चो में ही ईलाज की सुविधा दी जाती है मगर कुछ डॉक्टर्स ज्यादा रुपये कमाने के चक्कर मे अपनी सरकारी ड्यूटी से नदारत रह कर अपने प्राइवेट क्लीनिक और अस्पताल में मरीजो को बुलाते है और वहाँ पर इलाज के नाम पर लाखों रुपये कमाते है।
इसी क्रम में समुदायिक स्वास्थ केन्द्र रामनगर मे मरीजो का इलाज के लिए ताता तो लगा रहता है। मगर समय से डॉक्टरों के न मिलने से मरीजों को मजबूरन उन डॉक्टरों के क्लीनिक या अस्पताल जाना पड़ता है। सूबे में योगी मोदी की सरकार होने के बावजूद डॉक्टरों पर कोई फर्क नही पड़ा है। वो तो अपने ढर्रे से जिंदगी जी रहे है। इस समुदायिक स्वास्थ केन्द्र पर दवाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पडता है। मरीजो को दवा भी मिलती है बाहर। कमीशन के चक्कर मे चिकित्सक और मेडिकल स्टोर की मिली भगत से चल रहा ये गोरख धान्धा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत काफी दयनीय है। यहा पर कर्मचारी हमेशा रहते है नदारत। 
मरीज को प्राइवेट अस्पताल/क्लीनिक भेजो और तगड़ा कमिशन पाओ
सूत्रो की माने तो निजी क्लीनिक व अस्पताल चलाने के चक्कर मे सरकार के लाखो रूपये का लगा रहे चूना। यहा पर अधिकारी के आने जाने का समय भी निर्धारित है। कल जब संवाददाता पहुचा तो दिन शुक्रवार को कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि 8:00 बजे से 12:00 बजे तक स्वास्थ्य केंद्र खुला रहेगा लेकिन मौके पर 8:00 बजे से 10:00 बजे तक कोई भी कर्मचारी उपस्थित नहीं रहा। मरीजों ने बताया कि यहां पर ना तो कोई डॉक्टर हैं, न ही कभी दवा मिलती है इसीलिए दवा के लिए डॉक्टर साहब कहते हैं कि बाहर मेडिकल स्टोर पर जाएं दवा वही मिल पायेगा।  सरकारी कर्मचारी शासन की मंशा को कर रहे तार-तार। यहा के मरीजो ने चिकित्सा प्रभारी पर लगाया  बाहर से दवा खरीदने का आरोप।

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